By Jagjit Singh

This Gazal is dedicated from all disciples to their Masters.

 

मुझ में जो कुछ अच्छा है सब उसका है,

 मेरा जितना चर्चा है सब उसका है, 

उसका मेरा रिश्ता बड़ा पुराना है, 

मैंने जो कुछ सोचा है सब उसका है, 

मेरे आँखें उसकी नूर से रोशन है, 

मैंने जो कुछ देखा है सब उसका है, 

मैंने जो कुछ खोया था सब उसका था, 

मैंने जो कुछ पाया है सब उसका है, 

जितनी बार मैं टूटा हूँ वो टूटा था, 

इधर उधर जो बिखरा है सब उसका है,

 

 

Credits:

Mujh mein jo kuch achha hai (Jagjit Singh)

FARQ