A gazal by Jagjit Singh

जो भी बुरा भला है, अल्लाह जानता है
बन्दे के दिल में क्या है, अल्लाह जानता है

ये फ़र्श-ओ-अर्श क्या है, अल्लाह जानता है
परदों में क्या छिपा है, अल्लाह जानता है

(फ़र्श-ओ-अर्श =ज़मीन और आसमान)

जा कर जहाँ से कोई, वापस नहीं है आता
वो कौन सी जगह है, अल्लाह जानता है

नेकी बदी को अपनी, कितना ही तू छिपाये
अल्लाह को पता है, अल्लाह जानता है

ये धूप छाँव देखो, ये सुबह शाम देखो
सब क्यों ये हो रहा है, अल्लाह जानता है

क़िस्मत के नाम को तो, सब जानते हैं लेकिन
क़िस्मत में क्या लिखा है, अल्लाह जानता है